वर्तमान डिजिटल युग में कंप्यूटर एक अविच्छेद्य अंग बन चुका है। यह न केवल एक यंत्र है, बल्कि एक सर्वव्यापी संसाधन है जो मानवीय क्षमताओं का विस्तार करता है। कंप्यूटर शब्द की व्युत्पत्ति लैटिन भाषा के कम्प्यूटरे (Compute) से हुई है, जिसका अर्थ है गणना करना। परन्तु आधुनिक संदर्भ में, यह डेटा प्रोसेसिंग, सूचना प्रबंधन, संचार एवं नियंत्रण का एक बहुआयामी उपकरण है।

कंप्यूटर की मूलभूत परिभाषा एवं विशेषताएँ
कंप्यूटर एक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो निर्देशों के अनुसार कार्य करती है। यह उपयोगकर्ता से इनपुट स्वीकार करता है, उस पर प्रक्रिया (प्रोसेस) करता है और अर्थपूर्ण परिणाम (आउटपुट) प्रदान करता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- गति (Speed): अतुलनीय गति से गणनाएँ करने की क्षमता
- शुद्धता (Accuracy): त्रुटिहीन परिणाम प्रदान करना
- स्वचालन (Automation): मानवीय हस्तक्षेप के न्यूनतम आवश्यकता
- विश्वसनीयता (Reliability): दीर्घकालिक स्थिर प्रदर्शन
- भंडारण क्षमता (Storage Capacity): अतुलित डेटा संग्रहण
- बहुउद्देशीयता (Versatility): विविध कार्यों का निष्पादन
कंप्यूटर की आर्किटेक्चरल संरचना: वॉन न्यूमैन मॉडल
आधुनिक कंप्यूटरों की संरचना जॉन वॉन न्यूमैन के मॉडल पर आधारित है, जिसमें निम्नलिखित मौलिक इकाइयाँ सम्मिलित हैं:
कंप्यूटर के मूलभूत घटकों का चार्ट
| क्रमांक | घटक | कार्य | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | इनपुट इकाई | उपयोगकर्ता से डेटा प्राप्त करना | कीबोर्ड, माउस, स्कैनर |
| 2 | सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट | डेटा प्रोसेसिंग एवं नियंत्रण | प्रोसेसर (CPU) |
| 3 | मेमोरी इकाई | डेटा एवं निर्देश संग्रहण | RAM, ROM, हार्ड डिस्क |
| 4 | आउटपुट इकाई | परिणाम प्रदर्शित करना | मॉनिटर, प्रिंटर, स्पीकर |
| 5 | अर्थमैटिक लॉजिक यूनिट | गणितीय एवं तार्किक संक्रियाएँ | CPU का भाग |
| 6 | कंट्रोल यूनिट | समस्त कार्यों का समन्वय | CPU का भाग |
सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट: कंप्यूटर का मस्तिष्क
CPU कंप्यूटर का सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक है, जो समस्त प्रोसेसिंग कार्यों का निष्पादन करता है। इसके तीन प्रमुख भाग हैं:
- अर्थमैटिक लॉजिक यूनिट (ALU): यह समस्त गणितीय (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) एवं तार्किक (AND, OR, NOT) संक्रियाओं का निष्पादन करती है।
- कंट्रोल यूनिट (CU): यह कंप्यूटर के समस्त घटकों के मध्य समन्वय स्थापित करती है तथा निर्देशों के निष्पादन का अनुक्रम निर्धारित करती है।
- मेमोरी रजिस्टर्स: ये अस्थायी भंडारण स्थान हैं जो तीव्र गति से डेटा एक्सेस प्रदान करते हैं।
कंप्यूटर मेमोरी का पदानुक्रम
मेमोरी को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory)
- RAM (Random Access Memory): अस्थायी भंडारण, विद्युत अनुपस्थिति में डेटा विलुप्त
- ROM (Read Only Memory): स्थायी भंडारण, निर्माता द्वारा प्रोग्रामित
द्वितीयक मेमोरी (Secondary Memory)
- हार्ड डिस्क ड्राइव (HDD): चुंबकीय माध्यम, उच्च क्षमता
- सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD): अर्धचालक तकनीक, उच्च गति
- ऑप्टिकल डिस्क: CD, DVD, Blu-ray
तृतीयक मेमोरी (Tertiary Memory)
- मैग्नेटिक टेप: अनुक्रमिक एक्सेस, बैकअप के लिए उपयुक्त
- क्लाउड स्टोरेज: नेटवर्क आधारित दूरस्थ भंडारण
सॉफ्टवेयर: कंप्यूटर की संकल्पनात्मक आत्मा

सॉफ्टवेयर निर्देशों एवं प्रोग्रामों का समुच्चय है जो हार्डवेयर को कार्य करने की क्षमता प्रदान करता है।
सिस्टम सॉफ्टवेयर
ऑपरेटिंग सिस्टम: विंडोज, लिनक्स, मैकOS – हार्डवेयर एवं उपयोगकर्ता के मध्य इंटरफेस
डिवाइस ड्राइवर्स: विशिष्ट हार्डवेयर के लिए नियंत्रण कार्यक्रम
यूटिलिटी सॉफ्टवेयर: डिस्क क्लीनअप, एंटीवायरस, बैकअप टूल्स
एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर
वर्ड प्रोसेसर: MS Word, Google Docs
स्प्रेडशीट: MS Excel, LibreOffice Calc
प्रेजेंटेशन सॉफ्टवेयर: MS PowerPoint, Google Slides
डेटाबेस मैनेजमेंट: Oracle, MySQL, MS Access
कंप्यूटर नेटवर्किंग
नेटवर्किंग कंप्यूटरों के मध्य संसाधन साझा करने की तकनीक है। नेटवर्क के प्रकार:
- LAN (लोकल एरिया नेटवर्क): सीमित भौगोलिक क्षेत्र
- MAN (मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क): नगरीय क्षेत्र
- WAN (वाइड एरिया नेटवर्क): विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र (इंटरनेट)

ऑपरेटिंग सिस्टम: कंप्यूटर का प्रबंधक
ऑपरेटिंग सिस्टम एक अत्यंत जटिल सॉफ्टवेयर है जो निम्नलिखित कार्यों का समन्वय करता है:
- प्रोसेस प्रबंधन (Process Management)
- मेमोरी प्रबंधन (Memory Management)
- फाइल सिस्टम प्रबंधन (File System Management)
- डिवाइस प्रबंधन (Device Management)
- सुरक्षा एवं अधिकार प्रबंधन (Security & Authorization)
कंप्यूटर की पीढ़ियाँ: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
| पीढ़ी | कालखंड | प्रौद्योगिकी | विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| प्रथम | 1940-1956 | वैक्यूम ट्यूब | अतिविशाल आकार, अधिक ऊर्जा खपत |
| द्वितीय | 1956-1963 | ट्रांजिस्टर | आकार में कमी, विश्वसनीयता में वृद्धि |
| तृतीय | 1964-1971 | इंटीग्रेटेड सर्किट | अतिलघुकरण, गति में वृद्धि |
| चतुर्थ | 1971-वर्तमान | माइक्रोप्रोसेसर | व्यक्तिगत कंप्यूटरों का उदय |
| पंचम | भविष्य | कृत्रिम बुद्धिमत्ता | स्व-शिक्षण क्षमता, न्यूरल नेटवर्क |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: कंप्यूटर में BIOS का क्या अर्थ है?
उत्तर: BIOS का पूर्ण रूप है बेसिक इनपुट/आउटपुट सिस्टम। यह एक फर्मवेयर है जो कंप्यूटर के स्टार्टअप प्रक्रिया (बूटिंग) को प्रारंभ करता है तथा हार्डवेयर घटकों का प्रारंभिक परीक्षण (POST) करता है।
प्रश्न 2: कैश मेमोरी क्या है एवं इसका क्या प्रयोजन है?
उत्तर: कैश मेमोरी एक अत्यंत उच्च गति वाली अर्धचालक मेमोरी है जो CPU एवं मुख्य मेमोरी के मध्य स्थित होती है। इसका प्राथमिक प्रयोजन बार-बार उपयोग होने वाले डेटा एवं निर्देशों को अस्थायी रूप से संग्रहीत करना है, जिससे प्रोसेसिंग गति में अभिवृद्धि होती है।
प्रश्न 3: कंपाइलर एवं इंटरप्रेटर में क्या अंतर है?
उत्तर: कंपाइलर सम्पूर्ण प्रोग्राम को एक साथ मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है, जबकि इंटरप्रेटर प्रोग्राम को पंक्ति दर पंक्ति अनुवादित करता है। कंपाइलर द्वारा तैयार कार्यक्रमों की निष्पादन गति उच्च होती है, परन्तु इंटरप्रेटर में डिबगिंग सरल होती है।
प्रश्न 4: हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर में मूलभूत अंतर क्या है?
उत्तर: हार्डवेयर कंप्यूटर के भौतिक, स्पर्शनीय घटक हैं (जैसे मॉनिटर, कीबोर्ड, प्रोसेसर), जबकि सॉफ्टवेयर निर्देशों एवं प्रोग्रामों का समुच्चय है जो हार्डवेयर को कार्य करने की क्षमता प्रदान करता है। हार्डवेयर बिना सॉफ्टवेयर के निरर्थक है, और सॉफ्टवेयर बिना हार्डवेयर के निष्क्रिय।
प्रश्न 5: ऑपरेटिंग सिस्टम के मुख्य कार्य कौन-से हैं?
उत्तर: ऑपरेटिंग सिस्टम के पाँच मुख्य कार्य हैं: प्रोसेस प्रबंधन, मेमोरी प्रबंधन, फाइल प्रबंधन, डिवाइस प्रबंधन, तथा सुरक्षा एवं अधिकार प्रबंधन। यह उपयोगकर्ता एवं कंप्यूटर हार्डवेयर के मध्य एक इंटरफेस के रूप में कार्य करता है।
निष्कर्ष: डिजिटल साक्षरता की अनिवार्यता
कंप्यूटर के मूलभूत ज्ञान का होना वर्तमान युग में एक आवश्यक कौशल बन गया है। यह न केवल व्यावसायिक क्षेत्र में, बल्कि दैनिक जीवन के समस्त पहलुओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कंप्यूटर की बुनियादी संरचना, कार्यप्रणाली एवं घटकों की समझ डिजिटल साक्षरता का प्रथम चरण है। जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी अग्रसर हो रही है, कंप्यूटर का स्वरूप भी परिवर्तित हो रहा है, परन्तु इसके मूल सिद्धांत स्थिर हैं। इन सिद्धांतों की गहन समझ ही भविष्य की उन्नत तकनीकों को आत्मसात करने की नींव प्रदान करती है।
इस लेख में प्रस्तुत मूलभूत अवधारणाएँ कंप्यूटर विज्ञान के विशाल समुद्र में प्रवेश करने का प्रथम द्वार हैं। आगामी अध्ययन में हम इन अवधारणाओं के गहन पहलुओं, उन्नत आर्किटेक्चर, प्रोग्रामिंग पैराडाइम्स एवं उभरती प्रौद्योगिकियों का विस्तृत विवेचन करेंगे।
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